About Kartavya Parv




हमारे देश के संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों के साथ ही मौलिक कर्तव्यों का भी समावेश है। देश के अधिकांश नागरिक संविधान में प्रदत्त अपने अधिकारों के प्रति सजग है, वे मौलिक कर्तव्यों के प्रति भी जवाबदेह बने इसे दृष्टिगत रखते हुए संविधान के अनुच्छेद 51 क में उल्लेखित मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पैदा करना आवश्यक है। अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित नागरिक ही एक अच्छे नागरिक की भूमिका का निर्वहन कर सकते है। कर्तव्य आधारित व्यवस्था और जीवन शैली ने हमारे देश को युगों तक सुखी तथा समृद्ध बनाये रखा।



भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 क में उल्लेखित मौलिक कर्तव्यों का विद्यार्थियों को बार-बार स्मरण कराए जाने की दृष्टि से उन्हें अपने छोटे-छोटे मूल कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हुए उनमें सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित कर जवाबदेह बनाया जा सकता है।



विद्यार्थियों को कर्तव्य बोध कराए जाने के लिए उन्हें स्वयं के, अपने परिवार के आस पड़ोस और समाज के प्रति आव’यक जवाबदेही की गतिविधियों से परिचित कराना आव’यक है।

एतदर्थ पं. दीनदयाल जयन्ती 25 सितम्बर से महात्मा गांधी जयन्ती 2 अक्टूबर तक कर्तव्य पर्व मानने का निर्णय लिया गया है।



इस प्रयोजन से कक्षा 1 से 12 तक सभी शासकीय/अशासकीय ’शिक्षण संस्थाओं में तिथिवार विभिन्न गतिविधियों का आयोजन निर्धारिात किया गया है। कक्षा 1 से 8 की गतिविधियों के संबंध में विस्तृत निर्देश राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा जारी किये गये है। इनका क्रियान्वयन सुनिशचत किया जाये।



मुख्यमंत्री जी का संदेश एवं शपथ


प्रिय विद्यार्थियों,

हम अपने प्रदेश को स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने जा रहे है, इस निर्माण में पूरे प्रदेश के कई जोड़ी हाथ लगे हुये है, इसमें आपका सहयोग भी शामिल हो रहा है। हम प्रदेश के वर्तमान के साथ इसके भविष्य को भी एक मजबूत आधार देने के लिए वचनबद्ध है। आने वाले कल में, आप सभी विद्यार्थी इस प्रदेश के और देश के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे और इसके लिए आव’यक है कि आप अपने अधिकारों के प्रति जितने जागरुक हों, अपने कर्तव्यों के लिए भी उतने ही तत्पर हों। अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हमारे प्रदेश के विद्यार्थियों के भावी जीवन में, उनके नागरिक अधिकार तो आधार बनेंगे ही, पर हमारे विद्यार्थी कर्तव्यों के भी कुशल कारीगर बनें ऐसी आप सभी से अपेक्षा है।

कत्र्तव्योंं की समझ और उनके बोध को और अधिक गहराई से विकसित करने के लिए हमारे स्कूल शिक्षा विभाग द्वारो प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में ’’ कत्र्तव्य पर्व’’ का आयोजन किया जा रहा है जिसके तहत विभिन्न कार्यक्रम तथा गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं ।

इसके अंतर्गत प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमोंतथा गतिविधियों का आयोजन किया गया । संविधान के अनुच्छेद 51 क में लिखे गए मौलिक कर्तव्यांे का वाचन किया गया। बच्चों ने अपनी कक्षा तथा विद्यालय परिसर को स्वच्छ तथा व्यवस्थित रखने के प्रयास किए। स्वाधीनता संग्राम सेनानियों तथा महत्वपूर्ण क्रांतिकारियों एवं देशभक्तों के व्यक्तित्व, देशप्रेम तथा कर्तव्यबोध की गाथाओं से बच्चे परिचित हुये। बच्चों ने बिजली पानी के अपव्यय को रोकने, सार्वजनिक सम्पतियों की देखभाल करने, सामाजिक शिष्टाचार के प्रति जागरूक होने, पर्यावरण संरक्षण, पाॅलीथीन से मुक्ति आदि दायित्वों को अपने कर्तव्यों में समाहित किया। आठ दिवसीय कार्यक्रम का आरंभ पं. दीनदयाल उपाध्याय जयन्ती 25 सितम्बर से किया गया है 28 सितम्बर को शहीद भगत सिंह का जन्म दिवस भी मनाया गया है और आज गांधी जयंती एवं लाल बहादुर शास्त्री जी की जयन्ती 02 अक्टूबर को ये पर्व औपचारिक रुप से सम्पन्न हो रहा है। येे तीनों ऐसे महापुरुष है, जिन्होंने अपना जीवन देश के प्रति, अपने कत्र्तव्यों के लिए न्यौछावर किया है।

किसी कवि ने ठीक ही कहा है ः-

कर्तव्य पालन कीजिए यह धर्म सुख का मूल है
निश दिन उसी को सोचिए तब यह सुलभ अनुकूल है
कर्तव्य पालन में किसी से भय न खाना चाहिए
विभु से सदा डरिये उसी में लौ लगाना चाहिए

25 सितम्बर 1940 को पं. दीनदयाल उपाध्याय का जन्म हुआ था। प्रिय बच्चो ! दीनदयाल जी जब आपकी उम्र के थे, तब उनके जीवन में एक ऐसी घटना घटी जो उनकी कत्र्तव्यपरक भावना से परिचित भी कराती है और प्रेरणा भी देती है। उनका लालन पालन उनके मामा के घर में हुआ। एक दिन घर का आटा समाप्त हो गया। मामी ने, विद्यार्थी दीनदयाल के सिर पर गेहूँ की पोटली रख दी और पिसा कर आटा लाने का निर्देश दे दिया। ऐसा करते समय मामी भूल गई कि दीनदयाल के सिर पर फोड़े निकले हुए है।

दीनदयाल गेहू पिसवाकर गर्मागर्म आटे की पोटली सिर पर रखकर ले आये। मामी ने जब सिर से पोटली उतारी तो उन्हें फोड़े दिखे वे प’चाताप करने लगी, लेकिन दीनदयाल मुस्कुराते हुए खड़े रहे। ऐसा था दीनदयाल जी का छात्र जीवन में अपने कत्र्तव्यों के प्रति समर्पण।

28 सितम्बर को शहीद भगत सिंह का जन्म दिवस आप सभी ने मनाया है। क्रांतिकारी परिवार में जन्मे बालक भगत को खेत पर कुछ काम करता देख, चाचा करतारनाथ ने पूछा ये क्या कर रहे हो ? बालक भगत का उत्तर था बन्दूकं बो रहा हू , चाचा करतार नाथ को बालक भगत की बुद्वि पर हंसी आ गई, उन्होंने कहा बन्दूकें क्यो बो रहे हो ?

मातृभूमि के प्रति कर्तव्यवान बालक भगत का उत्तर था - इनसे जो फसल उगेगी, वो अंग्रेजो को मार भगाने के काम आएगी- ऐसे थे अपने बचपन में शहीद भगत सिंह के सपने ।

आज 02 अक्टूबर को, लाल बहादुर शास्त्ऱी और गांधी जयंती है। शास़्त्री जी ने अपना विद्यार्थी जीवन, विपरीत स्थितियों से संघर्ष कर, और उन पर विजय प्राप्त कर बिताया। स्कूल के दिनों में, वे गंगा तैरकर स्कूल जाते थे, और फिर तैर कर पुनः वापस आते थे। उनकी कर्तव्य भावना को, गंगा का विशाल पाट भी सीमित नहीं कर पाया।

इस अवसर पर बापू का एक प्रेरक प्रसंग हमें याद आ रहा है। एक बार गांधी जी को किसी नाराज व्यक्ति ने पत्र लिखा। पत्र में आरंभ से अन्त तक, गांधी जी के लिए केवल अपशब्द लिखे हुये थे। गांधी जी पत्र पढ़कर मुस्कुराये, उन्होंने पत्र से ’’पिन’’ को निकालकर रख लिया शेष कागज फाड़कर फेक दिये, ये देखकर सामने बैठे हुये व्यक्ति ने गांधी जी से कहा, बापू आपने पत्र पढ़कर फाड़ दिया और पिन निकालकर क्यों रख ली ? गांधी जी ने सहजभाव से जवाब दिया, पत्र में गालियां थी, जो मेरे काम की नहीं थी, लेकिन पिन का उपयोग आगे भी होता रहेगा।

बच्चो ! कत्र्तव्य का अर्थ है, हमारे वो सभी दायित्व तथा कार्य जिनके एक नागरिक के रुप में किये जाने की अपेक्षा, समाज और देश करता है।

हमारे संविधान की धारा 51-’क’ में हमारे मूल कत्र्तव्यों की परिभाषा दी गई है, हमारे प्रदेश के सभी विद्यार्थी, अपनी कत्र्तव्यपरक गतिविधियों को निरंतर जारी रखेंगे, इसी आशा के साथ हम सभी शपथ लेंगे।, शपथ की एक-एक पंक्ति हम क्रम के साथ यहां से बोलेंगे, और आप सभी प्रदेश के विद्यार्थी अपने-अपने विद्यालय में इसे सुनते हुये दोहरायेंगे। हमारे साथ यहां भी कुछ बच्चे शपथ ले रहे हैं, आप सब विद्यार्थी भी इनके स्वर में स्वर मिला कर शपथ लीजिए-

  • -हम शपथ लेते हैं कि संविधान का पालन करेंगे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करेंगे।
  • -स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को, हृदय में रखेंगे और उनका पालन करेंगे।
  • -भारत की प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करेंगे और उसे अक्षुण्ण रखेंेगे।
  • -देश की रक्षा करेंगे और आह्वान किये जाने पर, राष्ट्र की सेवा करेंगे।
  • -भारत के सभी लोगों में समरसता और समान बन्धुत्व की भावना का निर्माण करेंगे।
  • - धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से दूर रहेंगे तथा ऐसी प्रथाओं का त्याग करेंगे जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हो।
  • -अपनी सामाजिक संस्कृति की, गौरवशाली परंपरा का महत्व समझेंगे और उसका परिरक्षण करेंगे, और उसका संवर्धन करेंगे तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखेंगे।
  • -वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करेंगे।
  • -सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखेंगे और हिंसा से दूर रहेंगे।
  • -व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत् प्रयास करेंगे, जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुये प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊँचाईयों को छू लें

कर्तव्य पालन की शपथ


हमारे संविधान की धारा 51-’क’ में हमारे मूल कत्र्तव्यों की परिभाषा दी गई है, हमारे प्रदेश के सभी विद्यार्थी, अपनी कत्र्तव्यपरक गतिविधियों को निरंतर जारी रखेंगे, इसी आशा के साथ हम सभी शपथ लेंगे।, शपथ की एक-एक पंक्ति हम क्रम के साथ यहां से बोलेंगे, और आप सभी प्रदेश के विद्यार्थी अपने-अपने विद्यालय में इसे सुनते हुये दोहरायेंगे। हमारे साथ यहां भी कुछ बच्चे शपथ ले रहे हैं, आप सब विद्यार्थी भी इनके स्वर में स्वर मिला कर शपथ लीजिए-

  • -हम शपथ लेते हैं कि संविधान का पालन करेंगे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करेंगे।
  • -स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को, हृदय में रखेंगे और उनका पालन करेंगे।
  • -भारत की प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करेंगे और उसे अक्षुण्ण रखेंेगे।
  • -देश की रक्षा करेंगे और आह्वान किये जाने पर, राष्ट्र की सेवा करेंगे।
  • -भारत के सभी लोगों में समरसता और समान बन्धुत्व की भावना का निर्माण करेंगे।
  • - धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से दूर रहेंगे तथा ऐसी प्रथाओं का त्याग करेंगे जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हो।
  • -अपनी सामाजिक संस्कृति की, गौरवशाली परंपरा का महत्व समझेंगे और उसका परिरक्षण करेंगे, और उसका संवर्धन करेंगे तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखेंगे।
  • -वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करेंगे।
  • -सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखेंगे और हिंसा से दूर रहेंगे।
  • -व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत् प्रयास करेंगे, जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुये प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊँचाईयों को छू लें

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